बुधवार, 10 मार्च 2010

बोतल में घुसने वालो को फ़लक छोटा ही नजर आता हैं

अब क्या कहें उनको
वो पी कर बहक जाते हैं
मय की खुमारी में
बोतल में घुस जाते हैं 
ख़ुदी से भरे हुए
ख़ुदाई  सिखाते  हैं 
जब बोतल से निकल  नहीं पाते तो
चिल्ला चिल्ला के सबको बोतल में बुलाते हैं
जो बोतल में आ जाये 
तो उसे सबका यार बताते हैं
जो बोतल में न आये 
तो उसे सबका दुश्मन बताते हैं
बोतल में घुसने वालो को फ़लक छोटा ही नजर आता हैं 
जरा बाहर निकल के देखो फ़लक अपनी बाहें कहाँ तक फैलाता हैं

.......यारों  इशारे करता हैं ख़ुदा सभी की खातिर.......
...... ह़क परस्त ही समझे हैं अब तक ....... शैतानो को कहाँ नजर आते हैं.... ...........

28 टिप्‍पणियां:

  1. सच है अपनी सोच का दायरा भी बोतल के बंद कमरे से बाहर आ कर बड़ा करना चाहिए ...

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  2. बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    संजय कुमार
    हरियाणा
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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  3. बहुत सुंदर और उत्तम भाव लिए हुए.... खूबसूरत रचना......

    Sanjay kumar
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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  4. फिर भी बोतल के जिन्न नही है ये

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  5. bahut hi sarthak post bilkul yatharth ke karib
    ati uttam.
    poonam

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  6. बहुत बढ़िया लिखा है आपने जो काबिले तारीफ़ है! उम्दा प्रस्तुती!

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  7. इतने दिन से कुछ लिखते क्यूँ नहीं हो भाई?

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  8. बोतल में घुसने वालो को फ़लक छोटा ही नजर आता हैं
    जरा बाहर निकल के देखो फ़लक अपनी बाहें कहाँ तक फैलाता हैं


    .......यारों इशारे करता हैं ख़ुदा सभी की खातिर.......
    ...... ह़क परस्त ही समझे हैं अब तक ....... शैतानो को कहाँ नजर आते हैं.... ...........


    होशमंदों को यह बात पते की लगेगी परन्तु पीनेवाले कहेंगे ‘पूछो जो कभी पी है?’
    हम ईमानदारों से कहते हैं ईमानदार बनों
    शरीफों से कहते हैं शरीफ बनो और
    सच्चे नागरिको से कहते हैं अच्छे नागरिक बनो।
    क्योंकि सुनते वही हैं जो जिम्मेदार हैं और सही राह पर हैं।
    एक होशमंद कविता

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  9. गजब....यथार्थ कि उत्तम अभिव्यक्ति....

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  10. पहली बार इस ब्लॉग पर आया हूँ , बहुत अच्छा लगा ये ब्लॉग .
    माधव पर आने और टिप्पड़ी ले लिए धन्यावाद

    http://madhavrai.blogspot.com/

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  11. मजा आ गया
    जितनी तारीफ़ की जाय कम है
    सिलसिला जारी रखें
    आपको पुनः बधाई
    साधुवाद..साधुवाद
    satguru-satykikhoj.blogspot.com

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  12. Pahli baar aayi hun apke blogpe..bada achha laga..!Saral,bebak shaili!

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  13. क्या बात है यश भाई, आपने तो कमाल कर दिया। इस खूबसूरत नज्म के लिए बधाई स्वीकारें।
    --------
    बूझ सको तो बूझो- कौन है चर्चित ब्लॉगर?
    पत्नियों को मिले नार्को टेस्ट का अधिकार?

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  14. अब क्या कहें उनको
    वो पी कर बहक जाते हैं
    मय की खुमारी में
    बोतल में घुस जाते हैं
    ख़ुदी से भरे हुए
    ख़ुदाई सिखाते हैं

    वाह.....लाजवाब.....!!

    बहुत खूब कहा आपने ......!!

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  15. सुन्दर सृजन , सुन्दर भावाभिव्यक्ति.

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  16. अब क्या कहें उनको
    वो पी कर बहक जाते हैं waah....

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  17. बोतल में घुसने वालो को फ़लक छोटा ही नजर आता हैं ।
    लेकिन सच कहूं तो मुझे फलक बहुत ही बड़ा लगता हैं एवं एक बार बोतल में घुस गचा तो मुझे प्रतीत होता है कि सोच , कल्पना एवं सपनों का आयाम अपना क्षितिज क्रमश: विस्तृत करते चले जाते हैं । मेरे पोस्ट पर आपका आमंत्रण है । धन्यवाद .

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  18. बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति| धन्यवाद|

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  19. होली पर बहुत बहुत शुभकामनाएं

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